नये मोटर व्हीकल क़ानून का आख़िर विरोध क्यों ?

हम समझते हैं उन नियमों को,  जिन्हें भारत सरकार ने जनहित में जारी किया,  न ही हम किसी पार्टी विशेष को सपोर्ट  कर रहे,    न ही  बग़ावत कर रहे  उन लोगों से जो,   इस एक्ट का विरोध कर  रहे हैं,    नये मोटर व्हीकल क़ानून का आख़िर विरोध क्यों ? कहाँ ख़ामी नज़र आयी हमें … पढ़ना जारी रखें नये मोटर व्हीकल क़ानून का आख़िर विरोध क्यों ?

चंद्रयान-2: हार नहीं मानना इसरो !

धड़कनों ने बुना खुली आँखों से  देखा,       वह ख़्वाब निराला  है  | तसव्वुर से तराशा तमाम ख़्वाहिशों में सिमटा,  वह चंद्रयान-2 उर  की ज्वाला  है | साँसों ने  सजाया  गौरव हृदय पर  ,  वह दर्द-ए-जिगर का रखवाला है | इसरो में  उपजी इबादत मेहर मेहनत की,   वह अरदास का प्याला है | नासा … पढ़ना जारी रखें चंद्रयान-2: हार नहीं मानना इसरो !

एक नज़्म तुम्हारी तस्वीर के पीछे

अनवरत तलाश करती है वह, वक़्त के झरोखे से मन की अथाह गहराई में, मोती-सी अनमोल,मन-सी मासूम,  बेबाकपन में डूबी एक ख़ूबसूरत-सी नज़्म | जिस्म से सिमटी वक़्त की तह, हर तह  को पलट फिर सहेजती है वह,  किसी में छिप जाती है किसी को छिपा देती है , तलाशती है मोती-सी अनमोल,मन-सी मासूम,  बेबाकपन में डूबी … पढ़ना जारी रखें एक नज़्म तुम्हारी तस्वीर के पीछे

यादों के निशां

प्रीत पद से बांध, होठों पर सजा मुस्कान  वर्दी  सुर्ख   लाल  पहन  लेना  भारत  माँ  से  किया   जो  वादा  मेरी   प्रीत   भुला  देना  सो  चुका  जन  मानस  निद्रा   मे  व्यवधान  न आने   देना  सीने  पर  लेना  हर जख़्म  ज़ालिम  का निशान  मिटा देना  आह्वान करूँ  जन मानस से  हर  सैनिक को सीने से लगा लेना  … पढ़ना जारी रखें यादों के निशां

माँ

अंतर मन में बहे करूणा  माँ , स्नेह का संसार  नि:शब्द भावों में झलकें  माँ   मौन,  माँ मुखर  हृदय  का उद्गगार   आँखों  में   झलकें   स्नेह   माँ,   रण   में   हुँकार  आस्था  में  बैठा  विश्वास  माँ,  कर्म  पथ  का  विस्तार  नाजुक  डोर  बँधे  जीवन  की  माँ,  जीवन  का  सार  क़दम  क़दम पर ढाल बनी  माँ , दो … पढ़ना जारी रखें माँ

दोहे

देख  धरा  पर आवती,  प्रलय भरी सी  छाँव | अंधा  मानुष   है  बना ,  थके  हुए  है    पाँव || द्वेष  बवंडर   उड़  रहा,  उगे   गधे    के     सींग | होकर  भी  अभिमान  में , मनुज  मरता डिंग || देखा  देखी   बढ़  रही ,  बड़े   बेल  की    बात | अपनों   को  ही  मिल  रही,  … पढ़ना जारी रखें दोहे

नियति बन महके

                    शब्द  मधुर  हो  जन  मानस  के                      दिखा  नियति  ऐसा कोई  खेल                     करुण  ह्रदय  से  सींचे  प्रीत  को                    … पढ़ना जारी रखें नियति बन महके

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